Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
वातावकीर्णशरदम्बुदखण्डखण्डं व्योमेव केवलसमीरणमावृताङ्गम् ।
हसैर्लसद्विसलताकवलालसांसैः कालेन संचयकृतैरिव चन्द्रबिम्बैः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
बाण,
शक्ति, गदा, बन्दूक, त्रिशूल, तलवार, भाले, तेज तोमर, चक्र आदि हथियारों से लदे हुए ये योद्धा
इधर-उधर घूम रहे केशरूप तिनके और काठों से चंचल पर्वत पर प्रज्वलित वनाग्नि की तरह
चमकते हैं। और उनपर शर, शक्ति आदि के समूह सागर के देह के कम्पित होने पर पृथिवी पर
फैले हुए वहाँ के सर्पादिसमूह जैसे चमकते हैं