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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

तडित्प्रकाशोदरमस्यमेघनुन्नालजातोत्थरजःप्रभाभिः । पृषद्भरध्वान्तमयैकदेशं संध्याम्बराभोगमिवाप्रकाशम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे राजन्‌, उद्यत शस्त्रास्त्ररूपी भूषणों से भासुर इस शूरवीर पुरुष में संग्राम लक्ष्मी के हाथ में स्थित श्रेष्ठ तलवारूपी नील कमलों की माला से श्याम, घोड़ों के खुरों से उठी घनी धूलि से हुआ अन्धकाररूपी यह निशागम संग्राम भूमि में कैसे क्रमण करता है आशय यह कि क्या लक्ष्मी इसको इस रात्रि के समयरूप स्वयंवर में बरती है या नहीं, यह कौतुक देखिये