Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 62
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, verse 62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 62
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
कहीं पर नदी के किनारे निर्माल्य, अक्षत आदि खाने के लिए शिवलिंग के ऊपर कोव-कोव
कर रहे कवे को देखकर कोड अनुचर उप्चके कॉव-काँव करने के आशय की उत्प्रेक्षा करता है /
शिवलिंग के ऊपर काँव-काँव करता हुआ कौवा अपने को दृष्टान्तरूप से दर्शा रहा है, हे
लोगों, अधोगति के हेतुभूत सब पातकों में से शिवस्वभक्षण के लिए शिवलिंग के आश्रयरूप
सर्वोत्कृष्ट पातक को प्राप्त हुए प्रत्यक्ष काकरूप मुझे देखो