Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 115 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
हा वाति नीलजलदप्रसरानुसारी वातः किरन्विटपिपल्लवपुष्पगुच्छान् ।
धीरोत्करद्रुमवनान्तरचारचारुरासारसीकरकदम्बकसारसारः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
यह मन्दराचल पर्वत कन्दराओं
से निकले हुए वायु के झोकों से आकाश में पुष्पवर्षी मेघो का विस्तार कर रहा है अर्थात् शिखर
पर छाये हुए मेघो को फूलों से पूर्ण कर रहा है, देखिये