Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 115 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
सावश्यायाश्याननीहारधारा धारोद्गारान्वारिदान्मादयन्तः ।
शीतानीतोद्दामरोमाञ्चचर्चाः प्रोद्यच्छब्दं वान्त्यहो वर्षवाताः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
महेन्द्र पर्वत की अरतिकारिणी (उदास) भूमियों में पहुँचकर उनमें अभिरुचि न
होने से गुहारूपी गृहो मेँ रति के लिए समुद्री मार्ग से लौटे सिद्ध और साध्यरूप देवयोनियों के
रतिश्रम को हटाने से सुखकारी यह वायु बह रहा है