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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 115 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

करिकरटगलितमदजलवलितश्चलवीचिचञ्चरीकचयैः । चर्वित एष कदर्थित इव कणनिकरो विरौति वारिनिधौ ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

तरगों के शिखरो पर घूम रहे समुद्री मगर और जंगली हाथी तरंगशिखरों के निकलने ओर प्रविष्ट होने पर एक दूसरे के ग्रहण के लिए सूँड़ों और खोले हुए मुँहों से बादलों से अनुद्रुत जलकण गिरानेवाले मेघों की भाँति कौतुक देखनेवालों का मन हरते हैं