Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 115 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
कोमलकनकलतालयविलसितललनाविलोलवलयकृतम् ।
श्रवणरसायनपानं विततमिहाकर्णयास्य तटे ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
वनसमूहों से भरे हुए छोटे-छोटे पर्वत, जिनके
शिखरो पर रत्न विराजमान हैं वायुवश वन के कम्पित होने पर नीची ऊँची गतियों से चलनेवाले
बनकर सर्पा की भाँति सरकते हैं