Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 114, Verses 3–4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 114, verses 3–4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 114 · श्लोक 3,4
संस्कृत श्लोक
इमा बकुलपुन्नागनालिकेरकुलाकुलाः ।
विपिनावलयो वान्तविविधामोदमारुताः ॥ ३ ॥
लुनात्युपत्यकां वार्धिः शैलशालिशिलावलीः ।
वनालीर्लहरीदात्रैरापादफलपल्लवाः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
नदियों के प्रवाहों की नाई उन्होने दूर से
अपनी सेनाओं का निरन्तर शत्रु सेना से सम्पर्क रखते हुए समुद्र के तट तक अनुसरण किया । दूर
तक बिना विश्राम लिए चलने से विपश्चित के सैनिकों के वे जीवननिर्वाह और युद्ध आदि के साधन
प्रतिदिन के व्यय से छोटी-छोटी नदियों के जल की भाँति क्षीण हो गये