Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
हेतिवृत्तोग्रसंघट्टपुष्पजातझणज्झणः ।
तरत्तरलसारावतुरङ्गमतरङ्गकः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
उस युद्ध में बहुत बड़ा झुण्ड बाँधकर अनायास प्रहार करनेवाले असंख्य राक्षसां
द्वारा चुपचाप स्वयं योद्धाओं का मांस खाकर शवों के ढेर के ढेर उठा ले जाकर पर्वत गुहारूप अपने
घर में अपने परिवार के - विषवृक्षसदृश-सब राक्षसो को भोजन कराया गया था