Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
तमालोक्य रणाम्भोधिमगस्त्योऽस्य भवाम्यहम् ।
इति संचिन्त्य मनसा स पातुं तं रणार्णवम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
धूलिरूपी मेघों में चक्ररूपी
बिजलियाँ कौंध रही थी, शस्त्रास्त्रं से ठसाटस भरा होने के कारण अवकाशरहित भूतल वहाँ पर
वारो का आधार नहीं रह गया था