Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
स्फुरज्ज्याविद्युतः शूरवारिदा घनगर्जिताः ।
नाराचधारा मुञ्चन्तु कचत्कोदण्डकुण्डलाः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अपनी कान्ति से दशो दिशाओं
को जगमगानेवाले प्रातःकाल में खिले हुए कमल से सूर्य के प्रकाश से उत्पन्न हुई शोभा प्रकट होती
है वैसे ही प्रसन्न वदन तथा अपनी कान्ति से सकल दिशाओं को उद्भासित करने में उद्यत राजा
विपश्चित् से, प्रखर प्रताप से उपार्जित सम्पत्तियाँ कवियों को प्रातः प्रातः प्राप्त होती थीं