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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verses 31–33

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, verses 31–33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 31-33

संस्कृत श्लोक

चतुर्मूर्तिरथोत्तस्थौ पावकाद्बसुधाधिपः । प्रज्वलंस्तेजसां पुञ्जैर्नारायण इवार्णवात् ॥ ३१ ॥ ते देहास्तस्य चत्वारो विरेजुर्भास्वरत्विषः । सहजातोत्तमोत्तंसभूषणायुधवाससः ॥ ३२ ॥ सकंकटशिरस्त्राणाः समौलिकटकाङ्गदाः । सहारकुण्डलाभोगाः सर्वाः सर्वे महाशयाः ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

सेनाधिपति ने कहा : राजन्‌, तीनों दिक्पाल बहुत बड़ी सेना के साथ मानों आपकी आज्ञा से यम को जीतने के लिए यमपुर चले गये हैं, तदनन्तर उनके देशों का परिपालन करने में अशक्त मेरा पीछा कर रहे बहुत से राजा यहाँ जवर्दस्ती पहुँचे है । आपके मण्डल में शत्रुओं की यह बड़ी भारी सेना प्राप्त हुई है, सो हमारी पराजित सेना की जैसी दुर्दशा इन लोगों ने की है वैसी ही इनकी दुर्दशा कीजिये आपके लिए कुछ भी दुर्जय नहीं है