Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 108, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 108, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 108 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
समत्स्यमकरव्यूहा गजवाजिगणान्विताः ।
आवर्तचक्रव्यूहाढ्याः कल्लोलबलमालिताः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इस व्यवहार में तल्लीनता विद्वानों के लिए हास्यास्पद ही है, ऐसा कहते हैं /
जो लोग कभी उत्पन्न न हए अतएव असत् आकाशतुल्य पृथिवी आदि शून्य पदार्थ से व्यवहार
करते हैं वे मूढ़ अजात (उत्पन्न न हुए) मृत पुत्र का लालन-पालन करते हैं