Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
तत्रेदंप्रत्ययः प्रौढो भवत्यनुभवो हि यः ।
समायातमिदं भ्रान्तं तत्स्वप्नस्त्रीसमं विदुः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वप्न देखनेवाला जीव स्वप्न में मरकर जाग्रत में
जागा हुआ कहलाता है ओर यहाँ (जाग्रत् में) मरा हुआ स्वप्न मे जागा हुआ कहलाता है। इस तरह
स्वप्न ओर जाग्रत की समता ही है विषमता नहीं है