Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
यस्मिन्सर्वं यतः सर्वं यः सर्वं सर्वतश्च यः ।
यश्च सर्वमयो नित्यं स चिदाकाश उच्यते ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्न में सोये हुए पुरुष का
अपनी शयनभूमि का अननुभव उसकी असत्ता सिद्ध करता है वैसे ही सत् वस्तु असत् हो जाती है
और सब कुछ विपर्यास को प्राप्त हो जाता है जैसे कि रात्रि ही दिन हो जाती है