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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

यत उद्यन्ति यस्मिंश्च चित्राः परिणमन्त्यलम् । पदार्थानुभवाः सर्वे चिदाकाशः स उच्यते ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

में उत्पन्न होता है वैसे ही उत्पन्न न हुआ भी यह जाग्रत-जगत्‌ उत्पन्न हुआ-सा प्रतीत होता है एवं जैसे मरकर उत्पन्न हुआ भी पुरुष अपनी मृत्यु की विस्मृति होने पर मैं उत्पन्न नहीं हुआ हूँ, यों समझता है वैसे यह जगत्‌ उत्पन्न हुआ भी अनुत्पन्न ही है