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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 99

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, verse 99 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 99

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, आप निर्विकार शुद्ध बोधरूप तत्त्व के परिज्ञान से उक्त तत्त्व में एकरूप होकर सदा राज्य का परिपालन आदि व्यवहार करते हुए भी उसमें “भें कर्ता हूः, यह अभिमान न होने के कारण विकार से रहित परस्पर विरोधी द्वैत और अद्वैत से युक्त होकर और अन्दर अत्यन्त शीतल ही निरतिशय आनन्द को प्राप्त होइये, क्योंकि विक्षेप के कारणभूत ये पदार्थ है ही नहीं