Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 17
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
अथवा यह समिय कि आत्मतत्व के अविचार से ही चिक् में दृश्यता थी और इस समय विकार
करने पर वह नष्ट हो गई हैं, ऐसा कहते हैं ।
जो इन लोगों की दृश्यता थी, उसे आप अविचारणा जानिये यानी आत्मतत्त्व के अविचार का
ही वह फल था और वह विचार से अब नष्ट हो चुकी है, अतः दृश्यता कहाँ है ?