Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
ये तु विज्ञातविज्ञेयास्तादृशाः पावनाशयाः ।
जानन्ति तांस्तथैवान्तरहेः पादानिवाहयः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि तत्त्वज्ञानी के स्वरू को अज्ञानी नहीं जान सकते तथापि तत्त्वज्ञानी तो अवश्य ही
जानते हैं. यह कहते हैं ।
जो विज्ञेय पदार्थ का भली-भाँति ज्ञान कर चुके हों और उन्हीं के समान पवित्र अन्तःकरणवाले
ज्ञानी महानुभाव हैं, वे तो अपने अन्तःकरण में उन्हें ठीक उसी तरह से ऐसे जानते हैं, जैसे कि
साँपों के पैरों को साँप जानते हैं