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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 10, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 10, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

मुक्तं त्वहन्त्वशब्दार्थैर्लभ्यते यच्च तत्परम् । युक्तं त्वहन्त्वशब्दार्थैः प्रेक्ष्यमाणं विलीयते ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

उपलब्ध होता है वह परब्रह्म ही है तथा अहन्ता के शब्दार्थो से युक्त जो उपलब्ध होता है वह शास्त्र और आचार्य के अनभव से परीक्षा करके तत्त्वदृष्टि से देखने पर तो विलीन हो जाता है