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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 10, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 10, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

नित्यानन्दतयाऽजस्य कारणं नास्ति कार्यकृत् । सर्गाद्यसंभवे तस्माद्यदस्ति तदजं शिवम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

प्रयोजन की अपेक्षा न चाहने से भी यह सृष्टि नहीं हैं, यह कहते है/ अज परमात्मा के नित्यानन्दस्वरूप होने के कारण कार्यसम्पादन करनेवाला कोई कारण नहीं है क्रिया निमित्त कोई फल नहीं है । इसलिए सृष्टि आदि का संभव न होने पर जो कुछ है, वह सब अज शिवस्वरूप ही है