Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 99, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 99, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
यथास्ति वातो निःस्पन्दो यथास्ति खगतोपि वा ।
यथा हेमासंनिवेशमस्ति ब्रह्म जगत्तथा ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
“जगच्छब्दार्थरहितं यः पश्यति स पश्यति“ यह जो कहा है उसकी दृष्टान्तपूर्वक व्याख्या करते हैं ।
जैसे स्पन्दशून्य वायु, दीपादि आकारविशेष से शून्य आकाशगत प्रकाश अथवा कटकादि
रचनाविशेष से शून्य सुवर्ण है वैसे ही जगत् भी किसी रचनाविशेष से शून्य ब्रह्म ही है, ऐसी सम्भावना
अवश्य करनी चाहिए