Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 99, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 99, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
पुरः संकल्पके नष्टे संकल्पनगरस्य यत् ।
रूपं तद्विद्धि जगतः खादच्छं सदसन्मयम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
अब वह मुक्ति में कैसे स्थित है, उसे कहते है।
संकल्प के नष्ट हो जाने पर सामने स्थित संकल्पनगर का जो रूप रहता है उसे आप आकाश से
भी बढ़कर अत्यन्त स्वच्छ सत्असत्मय इस जगत् का रूप समझिये