Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 92, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 92, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
सा हि तत्त्वविदां मुख्या यद्यद्वक्ति करोति च ।
तत्सर्वं सत्यमेवाङ्ग तदनुष्ठेयमादरात् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए नहीं किया कि वह अतत्ववित् ओर मिथ्यावादिनी थी, इस शंका का वारण करते है ।
हे राजन्, वह तत्त्वविज्ञानियों में सर्वश्रेष्ठ हे । वह जो-जो कहती ओर करती है, वह सब सत्य ही
रहता है, अतः आपको आदर के साथ उसका अनुष्ठान करना चाहिए था