Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
एते राघव लीयेते अवाप्यं परिशिष्यते ।
अविद्यासंक्षयात्क्षीणो विद्यापक्षोऽपि राघव ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
शंका हो कि बाघ न होने के कारण विद्या भी परिशिष्ट रूप से क्यो नहीं रहती 2 तो इस पर
कहते हैं ।
हे राघव, अविद्या के विनाश से विद्याकल्पना भी उस तरह क्षीण हो जाती है, जिस प्रकार लकड़ी
के विनाश से अग्नि । जो अवशिष्ट रहता है, वह सर्वबाधात्मक होने से कुछ भी नहीं है और परमार्थतः
सद्-रूप होने से कुछ है भी, यह सब उसी से व्याप्त है