Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 89, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 89, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
मौर्ख्यादागामिन कालं वर्तमानक्रियाक्रमैः ।
अशोधयन्नरो दुःखं याति विन्ध्यगजो यथा ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए बुद्धिमान् पुरुष को इसी समय शास्त्रीय पुरुषप्रयत्नं से दुःखोत्पादक बीजों को दूर कर
आगामी काल का शोधन करना चाहिए, यो कहते है ।
मूर्खता के कारण जो पुरुष वर्तमान समय में शास्त्रीय क्रियाक्रमों से भविष्यकाल का शोधन नहीं
करता, वह विन्ध्यगज के सदश दुःख पाता हे