Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 89
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- Verses 1–7तोड़ने में प्रयत्न करने लगा ओर मुख के उन्नत आघातं से घण्टी के सदुश ध्वनि करने लगा
- Verses 8–11दो मुहूर्तो में बड़ प्रयत्न से उस हाथी ने अपने उन समर्थ दो दाँतों से उस श्रृंखलाजाल को उस…
- Verses 12–28सामने गिरे हुए उस शत्रु को देखकर महान् हाथी करुणा से भर गया, क्योकि तिर्यक् योनियों मेँ…
- Verse 29इसलिए बुद्धिमान् पुरुष को इसी समय शास्त्रीय पुरुषप्रयत्नं से दुःखोत्पादक बीजों को दूर कर…
- Verse 30जब तक सव दुःखो का मूल अज्ञान नष्ट नहीं होता, तब तक सैकड़ों प्रयत्नो से किया गया दुःख विना…
- Verse 31इससे अज्ञान ही मूलभूत बन्ध है, उसकी निवृत्ति अद्वितीय आत्मतत्त्वज्ञान से ही होती है, यह द…