Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 87, Verses 34–40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 87, verses 34–40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 34-40
संस्कृत श्लोक
साधुनैव समं ग्रासं भुञ्जानो वनकोटरे ।
तिष्ठावष्टब्धदुश्चेष्टो धराविवरकीटवत् ॥ ३४ ॥
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
कान्तया देवरूपिण्या तयैवं प्रतिबोधितः ।
अश्रुपूर्णमुखो वाक्यं शिखिध्वज उवाच ह ॥ ३५ ॥
शिखिध्वज उवाच ।
अहो नु बोधितोऽस्म्यद्य चिरात्सुरसुत त्वया ।
मौर्ख्यादार्यसमासङ्गं मुक्त्वाहमवसं वने ॥ ३६ ॥
अहो नु मे क्षयं यातं मन्ये पापमशेषतः ।
यत्त्वमेव समागत्य संप्रबोधयसीह माम् ॥ ३७ ॥
गुरुस्त्वं मे पिता त्वं मे मित्रं त्वं मे वरानन ।
शिष्यो नमस्करोम्यद्य पादौ तव कृपां कुरु ॥ ३८ ॥
यदुदारतमं वेत्सि यस्मिन् ज्ञाते न शोच्यते ।
भवामि निर्वृतो येन तद्ब्रह्मोपदिशाशु मे ॥ ३९ ॥
घटज्ञानादयो ज्ञाने विभागाः सन्त्यनेकशः ।
ज्ञानानां परमं ज्ञानं कतरत्तारकं भवेत् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
तो अव मुझे केसे रहना चाहिए ?
हे राजन्, तपश्चर्या आदि बहिर्मुख दुःखप्रद चेष्टाओं से विरत होकर आप गुरुजी के साथ ही
आहार खाते हुए इस वनकोटर मे, धरा छिद्र मेँ रहनेवाले कीट के समान, निश्चल होकर स्थित रहिए ।
वसिष्ठजी ने कहा : हे रामजी, देवता का रूप धारण की हुई उस कान्ता (चूडाला) द्वारा प्रबोधित वह
राजा शिखिध्वज आँसुओं से पूर्ण मुख होकर यह वचन कहने लगा । शिखिध्वज ने कहा : देवपुत्र,
आश्चर्य है कि बहुत समय के बाद आज आपके द्वारा मैं जगाया गया हूँ । मूर्खता से ही साधुसमागम
छोडकर मैं इतने समय तक वन मेँ रहा । अहो, मेरा पाप सम्पूर्ण नष्ट हो गया, ऐसा मैं मानता हूँ, क्योकि
आप ही यहाँ आकर मुझे जगा रहे हैं । हे सुन्दरानन, आप ही मेरे गुरु हैं, आप ही मेरे पिता हैं, आप ही
मेरे मित्र हैं, शिष्यरूप मैं आपके चरणों को प्रणाम करता हूँ, कृपा कीजिए । जिस उदारतम वस्तु को
आप जानते हैं, जिसके ज्ञात हो जाने पर प्राणी फिर शोक नहीं करता, जिससे मैं सुख में विश्रान्त हो
जाऊँ, उस ब्रह्मरूप वस्तु का मुझे उपदेश दीजिए। मुनिवर, ज्ञान में तो घटज्ञान, पटज्ञान आदि अनेक
तरह के भेद पाये जाते हैं, इसीलिए आपने “ज्ञान ही कल्याणकारक है" इससे जो परम तारकज्ञान कहा
वह घटज्ञानादि में से कौन ज्ञान है 2