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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 87, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 87, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

चूडालोवाच । ज्ञानमेव परं श्रेय इति ब्रह्मादयोऽपि ते । प्राहुर्महान्तो राजर्षे त्वं किमज्ञानवान्स्थितः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

चूडाला ने कहा : हे राजर्षे, प्रसिद्ध बड़े-बड़े ब्रह्मा आदि भी जब ज्ञान ही परम मोक्ष का साधन होने से कल्याणरूप है, यह निःसंदिग्ध कहते हैं, तब आप ज्ञान छोडकर “तप ही मोक्ष का हेतु है” यों निश्चय कर क्यों अवस्थित हैं ?