Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
सर्वथात्मनि तिष्ठेच्चेत्त्यक्त्वोर्ध्वाधोगमागमौ ।
तज्जन्तोर्हीयते व्याधिरन्तर्मारुतरोधतः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव प्राण और अपान वायु के गतिनिरोध के अभ्यास से सव अंगों के अन्दर सामान्यवृत्ति से
अन्यवृत्ति के ऊपर विजय होने पर सम्पूर्ण व्याधियो का नाश किया जा सकता है तथा मृत्यु पर भी
विजय पायी जा सकती है, यह कहते हैं।
सर्वथा अन्तरवायु के निरोध से ऊपर-नीचे का गमनागमन छोड़कर यदि सामान्यवृत्ति से जीव
संवित् शरीर में स्थित रहे, तो जन्तु की सब व्याधिर्यो नष्ट हो जाती हैं