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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 87

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, verse 87 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 87

संस्कृत श्लोक

विनाशपरिणामस्य दिनरात्रिक्रमस्थितेः । अभावोऽप्येकवस्तुस्थो गतो मुख्यप्रमाणताम् ॥ ८७ ॥

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार दूसरे पक्ष में भी, कार्य की उत्पत्ति-दशा में कारण की सत्ता विद्यमान नहीं रहती, इसमें हम दिन में रात की उपलब्धि नहीं करते“ इत्यादि अनुपलब्धि प्रमाण दिखलाते हैं। दिन और रात के क्रम की जो स्थिति है तद्‌-रूप विनाशपरिणाम में मुख्य प्रमाण एक वस्तुमात्र का ग्रहण करनेवाले प्रत्यक्ष प्रमाण से अविरूद्ध अभाव ही है । तात्पर्य यह कि विनाशरूप परिणाम में एकमात्र अनुपलब्धि ही प्रमाण है