Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 86
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, verse 86 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 86
संस्कृत श्लोक
सद्रूपपरिणामस्य मृद्घटक्रमसंस्थितेः ।
अक्षोपलम्भादितरत्प्रमाणं नोपयुज्यते ॥ ८६ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रथम पक्ष में, कार्य की उत्पत्तिदशा में कारण की सत्ता विद्यमान रहती है, इसमें अयं घट: मृदात्मक:”
इत्यादि प्रत्यक्ष प्रमाण दिखलाते हैं।
क्रमशः मिट्टी से घट की जो स्थिति होती है, उस स्थितिरूप सद्रूप परिणाम को जानने में
इन्द्रियोपलब्धि के सिवा-इन्द्रिय सन्निकर्ष के सिवा-अर्थात् प्रत्यक्ष प्रमाण से (70) अतिरिक्त और
कोई दूसरा प्रमाण उपयुक्त नहीं है