Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 84
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, verse 84 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 84
संस्कृत श्लोक
एकस्माद्यद्द्वितीयस्य संभवोऽङ्कुरबीजवत् ।
कार्यकारणभावोऽसौ सद्रूपपरिणामजः ॥ ८४ ॥
हिन्दी अर्थ
उपयुक्त दो कार्य-कारणभावों में पहले का उपपादन करते हैं।
जहाँ पर अंकुर बीज की नाईं एक से दूसरे की उत्पत्ति होती है वह कार्यकारणभाव सद्रूप परिणाम
से उत्पन्न कहा जाता है