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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 83

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, verse 83 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 83

संस्कृत श्लोक

कार्यकारणभावश्च द्विविधः कथितोऽनयोः । सद्रूपपरिणामोत्थो विनाशपरिणामजः ॥ ८३ ॥

हिन्दी अर्थ

दो दृष्टान्त कार्यकारणभाव के लिए हैं, इस पक्ष में भी अवान्तर दो भेदो में दो तात्पर्य हैं ही, यह कहते हैं। हे श्रीरामचन्द्रजी, इन दोनों में जो कार्यकारणभाव है वह भी दो तरह का कहा गया है - एक सद्रूप परिणाम से उत्पन्न और दूसरा विनाशरूप परिणाम से उत्पन्न