Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 75
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, verse 75 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 75
संस्कृत श्लोक
यदच्छं शीतलत्वं च तदस्यात्मेन्दुरुच्यते ।
इतीन्दोरुत्थितः सोऽग्निरग्नीषोमौ हि देहकः ॥ ७५ ॥
हिन्दी अर्थ
देह मे स्थित इन्धनभूत वन्द्रांश का लक्षण से विभाग करके (यह शरीर अग्नि और सोम स्वरूप है”
यह कहते है ।
इस शरीर में जो स्वच्छता ओर शीतलता वर्तमान है, उसकी आत्मा चन्द्रमा ही कही जाती है, यानी
वे चन्द्रमा के अंश हैं चन्द्रमा से वह अग्नि उत्पन्न है, इसलिए यह शरीर अग्नि ओर चन्द्रस्वरूप है