Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
विज्ञानाद्दूरसंस्थेन बुद्धिनेत्रेण राघव ।
दृश्यन्ते व्योमगा सिद्धाः स्वप्नवत्स्वार्थदा अपि ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
तो फिर वे किससे दिखाई देते हैं, कहते हैं।
हे राघव, योग के अभ्यास से मन के संस्कृत हो जाने के कारण विषयों से दूर संस्थित बुद्धिरूपी नेत्र
से स्वप्न की नाई आकाशगामी सिद्ध दिखाई देते हैं और वे अभीष्ट अर्थो को देते भी हैं