Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 103
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, verse 103 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 103
संस्कृत श्लोक
प्रकाशमनलं सूर्यं चिद्रूपं विद्धि राघव ।
जडात्मकं तमोरूपं विद्धि सोमशरीरकम् ॥ १०३ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रकाश और अप्रकाश रूप से आविर्ूत हए चित् ओर जड़ इन दोनों के अंशों से ही जगत् अग्नि
और वनद्रस्वरूप है, यह कहते है।
हे राघव, अग्नि, प्रकाश या सूर्य को आप चिद्रूप समझिये तथा चन्द्रमा को जडात्मा ओर
तमोरूप जानिये