Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 80, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 80, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
तस्यां समस्ताः संबद्धा नाड्यो हृदयकोशगाः ।
उत्पद्यन्ते विलीयन्ते महार्णव इवापगाः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
मूलाधार में स्थित कुण्डलिनी की सब नाड़ियाँ चक्षु आदि इन्द्रियों के प्रवर्तन में द्वार हैं, इस आशय
से कहते हैं।
उस कुण्डलिनी में हृदयकोश की समस्त नाड़ियाँ सम्मिलित हैं। वे सब नाड़ियाँ, सागर में नदियों
की नाई, उसीसे बारबार उत्पन्न होती हैं तथा उसीमें विलीन हो जाती है