Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 80, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 80, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियाद्रव्यसाधनाः सर्वसिद्धयः ।
जीवमाह्लादयन्तीह वसन्त इव भूतलम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
सिद्धि के तारतम्य मेँ तथा चिरकालिक एवं अचिरकालिक प्रयत्न की आवश्यकता मे उपाय
बतलाते हैं ।
देश, काल, क्रिया एवं द्रव्य की अपेक्षा रखनेवाली सब तरह की सिद्धियाँ यहीं पर, भूतल को वसन्त
के सदृश, जीव को मोहित करती हैं