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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 72, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 72, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 72 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

परोऽणुरेषोऽलभ्यत्वात्पूरकत्वान्महागिरिः । सर्वावयवरूपोऽपि निरस्तावयवः पुमान् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

-कस्याऽनवयवस्यैव परमाणुमहागिरे: इस छठे प्रश्न का उत्तर देते हैं। चक्षु आदि इन्द्रियों से ग्राह्य न होने से यह परमात्मा परमाणु है, लेकिन पूरक होने से चारों ओरसे व्याप्त महापर्वत हे (४) | यह परमात्मा (पुरुष) अध्यारोपदृष्टि से मूर्त और अमूर्तं सर्वविध पदार्थों का अवयवस्वरूप होता हुआ भी ˆनेति-नेति" इस अपवाद से अवयवों से शून्य है