Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 59
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
प्रतिकल्पक्षणं क्षीणैर्ब्रह्माण्डस्फुटबुद्बुदैः ।
कालेऽगाधरसस्यन्दे स्थित्वा स्थित्वा पुनःपुनः ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
सैकड़ों भ्रम और तृष्णारूपी अगाध जल-प्रवाह जिसमें बह रहा है, ऐसे काल-रूप महानद में
बार-बार स्थित हो -होकर कल्परूपी निमेषमात्र मे जो कारणभूत हिरण्यगर्भरूपी सारस पक्षी उड जाते
हैं, वह भी अविद्या का विलास हे