Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
भावाभावैरपर्यन्तैः सुखदुःखदशाशतैः ।
वैपरीत्यं प्रयात्येवमजस्त्रं जागती स्थितिः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
निरन्तर उत्पत्ति ओर विनाश से,
दुःख ओर सुख की सैकड़ों दशाओं से उस प्रकार जगत्स्थिति जो विपरिणाम को पुनः-पुनः प्राप्त
होती है, वह भी अज्ञान का विलास है