Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
मनो मुधैवाभ्युदितमसदेवानवेक्षणात् ।
स्वप्ने स्वमरणाकारं प्रेक्ष्यमाणं न विद्यते ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
तब आत्मदर्शन से मन का नाश कैसे होता है, यदि ऐसी कोई शंका करे तो इस पर “आत्मा के
अदर्शन से जन्य होने के कारण” यह कहते है ।
आत्मदर्शन के अभाव से असरूप ही मन मिथ्या ही उदित होता हे । स्वप्न मेँ अपने मरण के सदृश
दिखाई देता भी यह विद्यमान नहीं हे