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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

मनः पश्यति वै देहं बालो वेतालकं यथा । स्वात्मानं विलयं नीत्वा न भूयस्तं प्रपश्यति ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

देह में अहन्तादर्शनपूर्वक ही सब संसृतियाँ उत्पन्न होती हैं और अहन्तादर्शन में मन कारण है । मन की शान्ति हो जानेपर सव तरह की संसृतियो की शान्ति हो जाती है, यह कहते है । मन देह को उस तरह देखता है जिस तरह बालक वेताल को । स्वात्मा को विनष्ट करके तो मन फिर उसे नहीं देखता