Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
सम्यग्ज्ञानावबोधेन नित्यमेकसमाधिना ।
संख्ययैवावबुद्धा ये ते स्मृताः सांख्ययोगिनः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
साख्य ओर योग उसकी प्राप्ति मेँ उपाय हैं, यह आगे चलकर कहने की अभिलाषा से महाराज
वच्तिष्ठजी साख्ययोगियो का लक्षण बतलाते है ।
भलीभाँति ज्ञान के अवबोध और नित्य एक समाधि से जो विवेकविचारप्रयुक्त राजयोग के द्वारा
प्रबुद्ध (ज्ञानी) हुए हैँ वे सांख्ययोगी कहे गये हैं