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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, Verse 62

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, verse 62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

यथा द्रवत्वाद्वीच्यम्बु त्वन्योन्यं संमिलत्यलम् । तथा प्रबुद्धा जीवौघा मिथश्चित्त्वान्मिलन्त्यलम् ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

और उनके (तत्त्वज्ञ के) मिलने में कारण एकमात्र स्थूलता का अभाव ही है, इस आशय से कहते हैं। जैसे द्रवत्व के कारण तरंग और जल परस्पर एकरूप से अच्छी तरह मिल जाते हैं, वैसे ही प्रबुद्ध हुए जीव-समूह, चिद्रूप होने के कारण, परस्पर एकरूप से भलीभाँति मिल जाते हैं