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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

दृढाभ्यासो य एवास्य जीवस्योदेत्यविघ्नतः । सोऽत्यन्तमरसेनापि तमेवाश्वनुधावति ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

अतएव शास्त्रीय उपायों का अभ्यास ही सर्वश्रेष्ठ है, जो कि विरुद्ध अनेक जन्मो का व्यवधान होने पर भी पुनः आविर्भूत होकर परम पुरुषार्थ को सिद्ध ही कर देता है। इस जीव का निर्विघ्नतापूर्वक शास्त्रीय साधनों में जो ही दृढ अभ्यास उदित होता है, वह अत्यन्त नीरस हजारों जन्मों के व्यवधानों से युक्त होता हुआ भी शीघ्र उस जीव के ही पीछे पीछे दौड़ता है