Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
स भिक्षुर्जीवटो भूत्वा जन्तुर्जरठवासनः ।
तेषु देहेषु बभ्राम रन्ध्रेष्विव पिपीलिका ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
परम सिद्ध होते हुए भी उस भिक्षुक को अशास्त्रीय मानस-क्रीडा में प्रवृत्ति होने पर अनर्थो की
परम्परा प्राप्त हो गयी ।
जिस प्रकार चींटी छिद्रों में घूमती-फिरती है, उसी प्रकार अपनी दृढ़ वासनाओं से युक्त (७)
भिक्षुरूप वह जीव जीवटनामधारी होकर उन योनियों में घूमने लगा