Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
स कदाचिद्ददर्शाथ रुद्रं रुद्रपुरे खगः ।
वैरिञ्चनलिनीनाललीलालाभेन लीलया ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, वह हंसपक्षी अनायास ही ब्रह्मदेव के आसनभूत कमलिनी
के नाल में लीलाप्राप्त करने से यानी ब्रह्मदेव का वाहनरूप सामीप्य एवं मुक्तिरूप पद को प्राप्त करने
से किसी एक समय ब्रह्मदेव के साथ रुद्रपुर में पहुँचा और वहाँ उसने भगवान् रुद्र को देखा
सर्ग सन्दर्भ
बासठवाँ सर्ग समाप्त तिरसठवांँ सर्ग रुद्ररूपता को प्राप्त हुए उस हंस को पूर्व -देहों का ज्ञान, उनकी शतरुद्रता तथा एकरूपता-इनका वर्णन ।