Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 61, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 61, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
तस्मिन्निमेष एवास्मिन्कल्पता परिकल्प्यते ।
सुदीर्घस्वप्नखण्डोऽयं यथोदेति प्रजापतेः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रजापति की नाई सबको अपने-अपने स्वप्नो मे उस समय दीर्घ-प्रपंचता का भान होता ही है,
यह कहते है ।
जिस प्रकार प्रजापति को सृष्टिनामक दीर्घतम स्वप्न का प्रतिभास होता है, उसी प्रकार सब प्राणियों
में प्रत्येक को दीर्घ स्वप्न का प्रतिभास होता हे